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Is ke liye aap ashwagandha ke patte le kar paste banaye aur ghee ya shahad ke saath mila ke sevan kare. किसी बीमारी के समय भी अश्वगंधा का सेवन कर रहें हों, तो यह दूसरे दवाओं के असर को क्षीण कर सकता है. Ashwagandha is used in many diseases. विश्व में यदि सबसे अधिक जड़ी बूटियां कहीं पाई जाती हैं तो वह भारत है । भारत में हिमालय क्षेत्र में अनगिनत जड़ी बूटियां एवं दुर्लभ वृक्षों की प्रजातियां मौजूद है जिनमें आज भी वैज्ञानिक अनुसंधान लगातार हो रहे हैं । इन्हीं दुर्लभ जड़ी बूटियों में एक जड़ी बूटी है अश्वगंधा ।, अश्वगंधा जड़ी बूटी बहुत अधिक प्रसिद्ध एवं लोकप्रिय है । जो लोग आयुर्वेद में रुचि रखते हैं उन्हें अश्वगंधा के बारे में अवश्य मालूम होगा, लेकिन बहुत से लोगों को अश्वगंधा क्या है एवं उसमें कौन-कौन से गुण मौजूद होते हैं इसके बारे में नहीं मालूम होता है । आज इस लेख में हम अश्वगंधा के बारे में विस्तार से बात करेंगे ।, अश्वगंधा नाम दो शब्दों से मिलकर बना है अश्व एवं गंध अर्थात घोड़े जैसी खुशबू । इस जड़ी बूटी की जड़ एवं पत्तों से घोड़े के मूत्र एवं पसीने जैसी दुर्गंध आती है जिस कारण इसे अश्वगंधा कहा जाता है ।, आयुर्वेद शास्त्रियों का मानना है कि अश्वगंधा का सेवन करने से शारीरिक एवं मानसिक ताकत प्राप्त होती है तथा व्यक्ति में घोड़े जैसी ताकत आती है । अश्वगंधा मानसिक तनाव, चिंता, यौन समस्याएं, मधुमेह, थायराइड, इम्यूनिटी पावर, नेत्र एवं त्वचा के रोग, हृदय समस्याएं एवं संक्रमण में प्रयोग की जाती है । इस जड़ी बूटी में अनेकों दिव्य गुण मौजूद होते हैं जिनका वर्णन हम इस लेख में करेंगे ।, आपकी सुविधा के लिए हमने Dabur Ashvagandhadi Powder का लिंक नीचे दिया है । यह टोनिक आपके लिए सबसे बेस्ट रहेगा क्योंकि इसमें अश्वगंधा के साथ साथ मूसली, मंजिष्ठ एवं कुछ अन्य जड़ी बूटिय भी मोजूद हैं ।, अश्वगंधा मुख्य रूप से भारत में ही पाया जाता है । भारत के हिमालय क्षेत्र के अतिरिक्त यह सूखे प्रदेशों में पौधे के रूप में उगाया जाता है । बहुत से क्षेत्रों में इसकी खेती भी की जाती है । अश्वगंधा का पौधा हिमालय क्षेत्र में 2000 मीटर से 2500 मीटर की ऊंचाई तक पाए जाते हैं ।, अश्वगंधा के निम्न भाग औषधीय गुण धर्म हेतु प्रयोग किए जाते हैं ।, विशेष जानकारी: आजकल बाजारों में अश्वगंधा से मिलती हुई काकनज की जड़े मिलती हैं जिन्हें पंसारी लोग देसी असगंध कह कर बेचते हैं । कुछ पंसारी असली अश्वगंधा में काकनज की जड़े मिलाकर बेचते हैं, लेकिन काकनज की जड़े में अश्वगंधा जैसे दिव्य गुण मौजूद नहीं होते हैं, इसलिए संभव हो तो अश्वगंधा को ही लेकर आए ।, अश्वगंधा का पाउडर अश्वगंधा पाउडर या पत्तों का पाउडर दो से 4 ग्राम सुबह-शाम दूध के साथ ले सकते हैं ।, अश्वगंधा का काढ़ा अश्वगंधा का काढ़ा बनाने के लिए अश्वगंधा की सूखी हुई जड़ का पाउडर बना लें तथा दो चम्मच पाउडर को दो गिलास पानी में डालें  । 15 से 20 मिनट तक उबालने के बाद रख ले । इसे सुबह शाम आधा-आधा कप पिए ।, अश्वगंधा और घी का मिश्रण दो चम्मच अश्वगंधा चूर्ण तथा समान मात्रा में घी में इसे भून लें । इस मिश्रण को आधा-आधा चम्मच सुबह-शाम दूध के साथ लेने से शारीरिक शक्ति एवं वीर्य वृद्धि होती है ।, आइए अब हम अश्वगंधा के फायदे के बारे में विस्तार से जान लेते हैं ।, अश्वगंधा में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के गुण मौजूद होते हैं । वैज्ञानिक अनुसंधान में पाया गया है की अश्वगंधा पाउडर का सेवन करने से रक्त में लाल एवं श्वेत रक्त कणिकाओं की संख्या में वृद्धि होती है तथा हीमोग्लोबिन के स्तर में सुधार होता है । जिस कारण अश्वगंधा को रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने के लिए इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में प्रयोग किया जाता है ।, अश्वगंधा को डायबिटीज यानी शुगर के लिए काफी पुराने समय से सफलतापूर्वक प्रयोग किया जाता रहा है । विभिन्न शोध अध्ययन में यह सिद्ध हो चुका है की अश्वगंधा चूर्ण का 6 से 8 सप्ताह लगातार सेवन करने से रक्त में ग्लूकोज के स्तर में कमी आती है ।, अश्वगंधा पाउडर का सेवन करने से शरीर में इंसुलिन की मात्रा बढ़ती है जिस कारण डायबिटीज की समस्या में बहुत अच्छा आराम मिलता है । अश्वगंधा पैंक्रियास को इंसुलिन की पर्याप्त मात्रा बनाने के लिए उत्तेजित करती है ।, अश्वगंधा को शतावरी, सफेद मूसली, कोच के बीज जैसी जड़ी बूटियों के साथ यौन शक्ति बढ़ाने के लिए प्राचीन काल से प्रयोग किया जाता है । अश्वगंधा का 2 से 3 माह नियमित रूप से सेवन करने पर यौन अंगों को ताकत मिलती है, वीर्य गाढ़ा होता है तथा सेक्स क्षमता में वृद्धि होती है ।, अश्वगंधा को महिलाओं को भी दिया जा सकता है । अश्वगंधा में प्राकृतिक कामोद्दीपक गुण मौजूद होते हैं जिस कारण यह सेक्स बूस्टर के रूप में काम करता है ।, अश्वगंधा को हाइपोथायराइड की समस्या में प्रयोग किया जाता है । अश्वगंधा का सेवन करने से थायराइड ग्रंथि उत्तेजित होती है तथा यह सही प्रकार से कार्य करने लगती है । विभिन्न शोधों में यह पाया गया है कि यदि अश्वगंधा की जड़ों का रस थायराइड के पेशेंट को प्रतिदिन दिया जाए तो थायराइड ग्रंथि पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है तथा थायराइड हार्मोन सामान्य रूप से उत्सर्जित होता है ।, अश्वगंधा को विभिन्न मानसिक रोगों जैसे तनाव (हाइपरटेंशन), अवसाद (डिप्रेशन), चिंता, याददाश्त की कमी, मानसिक भ्रम एवं अन्य मानसिक रोगों में प्रयोग किया जाता है । अश्वगंधा मानसिक रोगों की एक सर्वश्रेष्ठ औषधि है ।, अश्वगंधा को शंखपुष्पी, ब्राह्मी जैसे जड़ी बूटियों के साथ मानसिक रोगों में प्रयोग किया जाता है । विभिन्न शोध अनुसंधान में यह पाया गया है कि जिन लोगों ने मानसिक रोगों में अश्वगंधा का नियमित रूप से सेवन किया है उनमें मानसिक तनाव अवसाद एवं अन्य समस्याओं में 80% तक की कमी आई है ।, जबकि जिन लोगों ने इस औषधि का सेवन नहीं किया उनके मानसिक रोगों में और वृद्धि हुई । चिकित्सा अनुसंधान में अश्वगंधा को मानसिक रोगों को दूर करने, याददाश्त की वृद्धि एवं मानसिक संतुलन बनाने के लिए एक सर्वश्रेष्ठ औषधि घोषित किया है ।, अश्वगंधा शारीरिक शक्ति बढ़ाने के लिए एक टॉनिक के रूप में प्रयोग की जाने वाली जड़ी बूटी है । शरीर की शक्ति बढ़ाने के लिए अश्वगंधा को विभिन्न प्रकार से प्रयोग किया जा सकता है ।, अश्वगंधा में एंटी ऑक्सीडेंट एवं तनाव को दूर करने वाले गुण मौजूद होते हैं । इतना ही नहीं अश्वगंधा का प्रयोग करने से रक्त में मौजूद कोलेस्ट्रोल एवं ट्राइग्लिसराइड की मात्रा कम हो जाती है तथा शरीर में अच्छा कोलेस्ट्रोल बनना शुरू हो जाता है । अश्वगंधा हृदय की मांसपेशियों को भी मजबूती प्रदान करता है, जिस कारण हृदय रोगों में है बहुत अच्छा फायदा पहुंचाता है ।, विभिन्न वैज्ञानिक अनुसंधानो से यह सिद्ध हुआ है की अश्वगंधा को कैंसर के लिए की जाने वाली विकिरण चिकित्सा तथा रसायन चिकित्सा में एक विकल्प के रूप में प्रयोग किया जा सकता है ।, अश्वगंधा में ट्यूमर को नष्ट करने के गुण मौजूद होते हैं तथा यह कैंसर के ट्यूमर को नष्ट करने में मददगार होता है । इतना ही नहीं कीमोथेरेपी के कारण शरीर में विभिन्न समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं जिन्हें दूर करने के लिए भी अश्वगंधा का प्रयोग किया जाता है ।, जानवरों में टेस्ट ट्यूब रिसर्च की गई हैं जिनसे यह सिद्ध हो चुका है की अश्वगंधा का सेवन करने से शरीर में अपॉप्टोसिस नामक रसायन का निर्माण होता है जो कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने में मददगार होता है ।, इतना ही नहीं यह रसायन कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से भी रोकता है । अश्वगंधा का सेवन करने से रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज बनता है जो कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करता है ।, अश्वगंधा में कीटाणु नाशक (एंटीबैक्टीरियल) एवं विषाणु नाशक (एंटीवायरल) गुण मौजूद होते हैं । जिस कारण अश्वगंधा का सेवन करने से बैक्टीरिया के कारण पैदा होने वाले संक्रमण एवं बुखार में लाभ मिलता है ।, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के जैव प्रौद्योगिकी केंद्र में अध्ययन के अनुसार अश्वगंधा में एंटीबायोटिक गुण मौजूद होते हैं जो विभिन्न संक्रामक रोगों को दूर करने के लिए लाभदायक होता है ।, अश्वगंधा का सेवन करने से शरीर में मौजूद फ्री रेडिकल नष्ट होते हैं जिस कारण यह असमय सफेद होने वाले बालों की समस्या को दूर करने में लाभदायक होता है । सफेद बालों की समस्या के लिए 2 से 4 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण का सुबह-शाम सेवन कर सकते हैं ।, अश्वगंधा को नेत्र ज्योति बढ़ाने में इस प्रकार प्रयोग किया जा सकता है । 2 ग्राम अश्वगंधा पाउडर, 2 ग्राम आमला पाउडर तथा 1 ग्राम मुलेठी का पाउडर इन तीनों को मिलाकर रख लें । सुबह शाम आधा-आधा चम्मच ताजे पानी के साथ सेवन करें । इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है तथा आंखों के रोगों में आराम मिलता है । इस नुस्खे को आप इसी अनुपात में अधिक मात्रा में भी बना सकते हैं ।, अश्वगंधा में गले के रोग गलगंड या गंडमाला को दूर करने के गुण मौजूद होते हैं । इस रोग में अश्वगंधा पाउडर तथा पुराने गुड़ को बराबर मात्रा में लेकर आधा-आधा ग्राम की गोलियां बनाकर रखें । सुबह-शाम इन गोलियों को बासी जल के साथ सेवन करने से गलगंड में आराम मिलता है । अश्वगंधा के पत्तों का पेस्ट बनाकर गले में रोग वाले स्थान पर लगाने से भी आराम मिलता है ।, अश्वगंधा को दमा श्वास एवं फेफड़ों के संक्रमण में सफलतापूर्वक प्रयोग किया जाता है । इसके लिए 2 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण ले तथा इसे 20 मिलीलीटर अश्वगंधा के काढ़े के साथ ही सेवन करें । इससे फेफड़ों के संक्रमण एवं दमा श्वास रोग में लाभ मिलता है ।, 2 ग्राम अश्वगंधा पाउडर, 1 ग्राम बड़ी पीपल का चूर्ण, 5 ग्राम घी, इन तीनों को मिलाकर सुबह शाम आधा-आधा चम्मच दूध के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है । इस नुस्खे को आप इसी अनुपात में अधिक मात्रा में बना सकते हैं ।, अश्वगंधा को खांसी में प्रयोग करने के लिए 10 ग्राम अश्वगंधा की जड़ को कूटकर इसकी लुग्दी बना लें । इसमें समान मात्रा में मिश्री मिलाकर आधा लीटर पानी में पकाएं । जब यह पानी पक्ते पकते 1 बटा 8 भाग रह जाए तब इसे ठंडा करके सुबह शाम 20-20 मिलीलीटर रोगी को पिलाने से खांसी में आराम मिलता है ।, अश्वगंधा पाउडर को सुबह-शाम दो-दो ग्राम ताजे पानी के साथ सेवन कराने से छाती के दर्द में लाभ मिलता है ।, अश्वगंधा को विभिन्न पाचन रोगों में प्रयोग किया जाता है । यह पाचन संस्थान पर बहुत अच्छा प्रभाव दिखाती है । पेट की बीमारियों में अश्वगंधा चूर्ण में समान मात्रा में बहने का चूर्ण मिला लें । सुबह-शाम दो-दो ग्राम गुड़ के साथ सेवन करने से पेट के विभिन्न रोगों में लाभ मिलता है ।, अश्वगंधा में गर्भाशय को ताकत पहचाने पहुंचाने के गुण मौजूद होते हैं । जिन महिलाओं का बार-बार गर्भ गिर जाता है तथा जिनका गर्भाशय बहुत ज्यादा कमजोर होता है उन्हें अश्वगंधा का सेवन कराया जा सकता है ।, इसके लिए 20 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण को 1 लीटर पानी में डालें तथा उसमें लगभग 250 मिलीग्राम गाय का दूध भी मिला दे । इस मिश्रण को अच्छी तरह पकाएं । जब सारा पानी उड़ जाए तथा केवल दूध ही रह जाए तब इसमें स्वाद अनुसार मिश्री मिला दे तथा मासिक धर्म के पश्चात महिला को 3 दिन तक सुबह शाम इस दूध का सेवन कराएं । इसका सेवन करने से गर्भाशय को बल मिलता है तथा महिला को गर्भ धारण हो जाता है ।, लिकोरिया महिलाओं का एक दुश्मन रोग होता है । इस रोग को दूर करने के लिए 2 से 4 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण को समान मात्रा में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करने से लिकोरिया में आराम मिलता है ।, वैसे तो अश्वगंधा पूर्ण रूप से प्राकृतिक एवं सुरक्षित औषधि है लेकिन फिर भी इसके निम्नलिखित दुष्प्रभाव हो सकते हैं ।, गर्भवती महिलाओं को अश्वगंधा का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इसका सेवन करने से गर्भपात हो सकता है । यदि आप मधुमेह डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मानसिक अवसाद, चिंता या अनिद्रा जैसी बीमारी से पीड़ित है एवं इन बीमारियों का आपका ट्रीटमेंट चल रहा है तो अश्वगंधा लेने से पहले अपने डॉक्टर से संपर्क अवश्य करें । अधिक मात्रा में अश्वगंधा का सेवन करने से पेट की समस्या हो सकती है । अश्वगंधा का सेवन करने से कुछ लोगों को एलर्जी हो सकती है ।, आप इस प्रोडक्ट को नीचे दिए गए लिंक से 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